Confession of a Congressi
शर्म को चवन्नी में बेच
मूंगफली खा गए है हम
मूंगफली तो मूंगफली
छिलके भी चबा गए है हम
देखो गर्व से पतलूने
उतरती रहें
सीटियों की मधुर ध्वनि
बजती ही रहें
युवराज से महाराज
तक तो खर्च बड़ा होगा
देशो को सिसिलीमय अब
बनाना ही होगा
जय मनु कपि मोहन का
मान अब आज़ाद कहाँ
बंधुआ बन के ही
चरणों में जगह पा
27/04/2012