Monday, July 28, 2014

फिर आयी रात अँधेरे की चादर ओढ़े
फिर से डाले हैं तेरी यादों के झूले हमने

फिर आयी रात...

तेरी यादों के समुन्दर में डूबे उभरे
पार करते रहे समुन्दर गहरे

फिर आयी रात.....
सहते रहे दर्द ए जुदाई फिर भी
तेरी यादों का दामन ना छूटा


फिर आयी रात.....

रूठना, रूठके मनाने की कोशिश करना
अब यहि काम है अंजाम की कोशिश करना

फिर आयी रात....