अब तो रातों में भी आहट से चौंक जाता हूं !
अन्ना , अरविन्द नाम से बौखला जाता हूँ !!
फिर सोचने लगता हूँ अपनी ही धुन में..
सिंह होकर भी कहाँ सियारों में फंस गया ?
बापू नाम मक्कारी से लेने वालों में बस गया :(
था मै गुरु - ग्यानी अब बस "मुकादम" हूँ,
गाता भी हूँ भैरव तो बस भैरवी सी लगती है ,
पता नहीं क्या चीज़ गले में आकर अटकती है ?
07/08/2012
अन्ना , अरविन्द नाम से बौखला जाता हूँ !!
फिर सोचने लगता हूँ अपनी ही धुन में..
सिंह होकर भी कहाँ सियारों में फंस गया ?
बापू नाम मक्कारी से लेने वालों में बस गया :(
था मै गुरु - ग्यानी अब बस "मुकादम" हूँ,
गाता भी हूँ भैरव तो बस भैरवी सी लगती है ,
पता नहीं क्या चीज़ गले में आकर अटकती है ?
07/08/2012
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