अपना रंज ओ ग़म से कुछ देर तो किनारा कर लो
हैं दुनिया में कुछ और मरहले बाकी
डूबती साँसों से कुछ देर तो किनारा कर लो
हैं दुनिया में कुछ और समंदर बाकी
अपनी रेशमी गुफ्तगू के सिलवटों से तो बाहर निकलो
की मेरे खुरदरे लफ़्ज़ों में अभी सुखन है बाकी
हैं दुनिया में कुछ और मरहले बाकी
डूबती साँसों से कुछ देर तो किनारा कर लो
हैं दुनिया में कुछ और समंदर बाकी
अपनी रेशमी गुफ्तगू के सिलवटों से तो बाहर निकलो
की मेरे खुरदरे लफ़्ज़ों में अभी सुखन है बाकी
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