चाहा था विचारों को बाँध सीमा मे
बंधक बना ले अपना
किंतु यह तो लगता है
अब निरर्थक सपना
सपने तो यादों की कच्ची
डोर से बंधे होते हैं
अचानक किसी स्पर्श से ..
बिखर जाते हैं
बिखरना तो जिंदगी की रीत है
और इसीलिए तो हमने भी
बिखराई प्रीत है
प्रीत एक सांचा है
प्रेम एक ढांचा है
यादों का चैतन्य ,
भावनाओं का समर्पण है
समर्पण मे छुपा अनुराग है
अनुराग ही तो स्नेह है
स्नेह का रूप ममता है
ममता के आगे सब बेबस हें
Friday, October 30, 2009
दीपो के त्यौहार मे हर्ष अपरंपार हो
मिठाई के स्वाद साथ प्रेम , मित्र , परिवार हो
फूलोंकी महक से घर आँगन सराबोर हो
मंगल कामना विश्व कल्याण से ह्रदय आत्मविभोर हो
मिले सफलता हर कार्य मे यही आत्मबल हो
मिटे अँधेरा ,अंहकार , मद यही मंगलाचरण हो
एक दिया ह्रदय मे भी निरपेक्ष भक्ति का प्रकाशित हो
मांगे यहीं हम , हर पल खुशी आपकी वृद्धिंगत हो
-शैलेश
१७/१०/२००९
मिठाई के स्वाद साथ प्रेम , मित्र , परिवार हो
फूलोंकी महक से घर आँगन सराबोर हो
मंगल कामना विश्व कल्याण से ह्रदय आत्मविभोर हो
मिले सफलता हर कार्य मे यही आत्मबल हो
मिटे अँधेरा ,अंहकार , मद यही मंगलाचरण हो
एक दिया ह्रदय मे भी निरपेक्ष भक्ति का प्रकाशित हो
मांगे यहीं हम , हर पल खुशी आपकी वृद्धिंगत हो
-शैलेश
१७/१०/२००९
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