चाहा था विचारों को बाँध सीमा मे
बंधक बना ले अपना
किंतु यह तो लगता है
अब निरर्थक सपना
सपने तो यादों की कच्ची
डोर से बंधे होते हैं
अचानक किसी स्पर्श से ..
बिखर जाते हैं
बिखरना तो जिंदगी की रीत है
और इसीलिए तो हमने भी
बिखराई प्रीत है
प्रीत एक सांचा है
प्रेम एक ढांचा है
यादों का चैतन्य ,
भावनाओं का समर्पण है
समर्पण मे छुपा अनुराग है
अनुराग ही तो स्नेह है
स्नेह का रूप ममता है
ममता के आगे सब बेबस हें
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