पहरे में पानी
ना राशन में चीनी
लूट कर फकीरों को
उचक्कों के दिलासे
इस बार के मेले में
फिर बटेंगे सिक्के
फिर कसमे लेंगे
कुछ संविधान पर
तो कुछ मजहब के नाम पर
बेच कर जमीं और जमीर
आराम फ़र्मा रहें हैं अमिर
कहते हैं ...
नयी सहर होने वाली है
ना राशन में चीनी
लूट कर फकीरों को
उचक्कों के दिलासे
इस बार के मेले में
फिर बटेंगे सिक्के
फिर कसमे लेंगे
कुछ संविधान पर
तो कुछ मजहब के नाम पर
बेच कर जमीं और जमीर
आराम फ़र्मा रहें हैं अमिर
कहते हैं ...
नयी सहर होने वाली है
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