Monday, June 9, 2008

कब से आए हो खयालो मे तुम

कब से आए हो खयालो मे तुम
की अब यहीं दील मी घर कर गए हो

वो तुम्ही तो मेरी यादों को समंदर
कर गए हो

रात आधी हो चली है प्यास नीरंतर
कर गए हो

कब से आए हो खयालो मे तुम
की अब यहीं दील मी घर कर गए हो

सपना आए तभी तो टूटेगा
नींद आए तब तो जागेगा
रात अभी और गहराए तभी तो सूरज उगेगा
ख्यालों मे आकर प्रेम मे वीश्वास भर गए हो

कब से आए हो खयालो मे तुम
की अब यहीं दील मी घर कर गए हो

शैलेश
11062008

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