दील तुमसे मीलने का ही तोः तलबगार था
जैसे रातों को सुबह की आस थी ,
वैसे ही इस दील मे तुमसे मीलने की प्यास थी
दीलवाले तो अक्सर नादानियाँ करते हैं ,
बा होश बेहोशी की बातें करते हैं
बा होश बेहोशी की बातें करते हैं
तुम ही जानो , तुमहारे वादे ,
हम तो दील की बातों पे अमल करते हैं ।
शैलेश
07062008
शैलेश
07062008
No comments:
Post a Comment