खुशी के पल मे खुल के झूमो
वक्त बेरहम बढ़ता ही जा रहा है
फैसले है तो चुन्लो
विकल्प कम ही तो होते जा रहें है
आँधियों के बीच छप्पर को संभालो
हवा अबके कुछ इरादों से आ रही है
पानी की दो चार बूंदों से अब मन भर लो
सूरज अब अपनी गर्मी दीखा रहा है
कूछ चाहतों को पल दो पल तो जी लो
इन्ही पलो को फीर उम्र करलो
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